भोपाल, अग्निपथ। मध्य प्रदेश की आम जनता और खासकर कमजोर वर्ग को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश में हाल ही में बढ़ाए गए बस किराए की पुनः समीक्षा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान जनता से सीधा फीडबैक मिला था कि बस किराए में अत्यधिक बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम यात्री बेहद असहज महसूस कर रहे हैं। जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि किराया वृद्धि का युक्तियुक्तकरण किया जाए, ताकि यात्रियों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
जनता से मिले सीधे फीडबैक के बाद संवेदनशील फैसला
प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरों और प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री लगातार आम जनता तथा समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। समीक्षा बैठकों और जनसंवाद के दौरान कई जिलों से एक जैसा ही फीडबैक सामने आया कि किराए में हुई भारी वृद्धि से आमजन परेशान हैं। इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि पूर्व में तय की गई दरों पर पुनर्विचार किया जाए। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम यात्रियों पर अनुचित आर्थिक बोझ न पड़े और राज्य के करीब आठ करोड़ पचास लाख नागरिकों के लिए आवागमन सुलभ और सस्ता बना रहे।
अगस्त में हुई थी साठ प्रतिशत तक की वृद्धि
उल्लेखनीय है कि लगभग पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इसी वर्ष अगस्त के प्रथम सप्ताह में सरकार ने बस किराए में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। डीजल, टोल टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और वाहनों के रखरखाव की लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए निजी बस ऑपरेटर लगातार किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। जिसके बाद सामान्य बसों का किराया एक रुपये पच्चीस पैसे से बढ़ाकर दो रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया था, जबकि न्यूनतम किराया सात रुपये से बढ़ाकर दस रुपये किया गया था। बिना एसी वाली डीलक्स बसों का किराया सामान्य बसों से पच्चीस प्रतिशत, एसी डीलक्स का पचास प्रतिशत और सुपर लग्जरी कोच का किराया पचहत्तर प्रतिशत तक अधिक तय किया गया था।
ऑपरेटरों और यात्रियों के हितों में बनेगा संतुलन
परिवहन विभाग अब मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप किराया वृद्धि के युक्तियुक्तकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। सरकार इस बात का विशेष ध्यान रख रही है कि किराए में कटौती करते समय निजी बस ऑपरेटरों को कोई आर्थिक नुकसान न पहुंचे। इसके लिए विभाग जल्द ही मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन और निजी बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित करेगा। आपसी समन्वय और ऑपरेटरों से सुझाव लेकर एक व्यावहारिक रास्ता निकाला जाएगा, जिससे जनता को राहत मिलने के साथ-साथ ऑपरेटरों के हित भी सुरक्षित रह सकें।

