मध्य प्रदेश में निजी विद्यालय संचालन के लिए नए नियम

भोपाल, अग्निपथ। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में निजी विद्यालयों के संचालन, मान्यता और पाठ्यचर्या संबंधी व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी तथा सख्त बनाने के उद्देश्य से नई नियमावली जारी की है। अब किसी भी अशासकीय विद्यालय को नई मान्यता प्राप्त करने अथवा पुरानी मान्यता के नवीनीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक शर्तों का पूर्ण रूप से पालन करना अनिवार्य होगा। इन नियमों का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ संस्था की मान्यता समाप्त करने का कड़ा प्रावधान भी शामिल किया गया है।

सुरक्षा निधि और ढांचागत व्यवस्थाएं

शासन की नई नीति के अंतर्गत अब प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों की कुल संख्या के आधार पर एक निश्चित सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में पर्याप्त भौतिक बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित शिक्षण staff, आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, सुसज्जित प्रयोगशालाएं, विस्तृत पुस्तकालय और विद्यार्थियों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक सुविधाओं को अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य मान्यता समिति का गठन

प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष तीन सदस्यीय राज्य मान्यता समिति का गठन किया जाएगा। इस शक्तिशाली समिति में शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त तथा माध्यमिक शिक्षा मंडल के उच्च अधिकारी सम्मिलित रहेंगे। यह समिति विद्यालयों की मान्यता, स्थान परिवर्तन, संकाय वृद्धि और नाम परिवर्तन से जुड़े सभी आवेदनों पर नीतिगत निर्णय लेगी।

आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा

निजी शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता अथवा नवीनीकरण हेतु तय दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत करना होगा। प्रत्येक वर्ष तीस सितंबर तक प्राप्त होने वाले आवेदनों पर उसी शैक्षणिक सत्र के लिए विचार किया जाएगा। इस तिथि के पश्चात प्राप्त आवेदन अगले सत्र के लिए मान्य होंगे। सक्षम प्राधिकारी को ऑनलाइन आवेदन मिलने के पैंतालीस दिवस के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा। यदि आवेदन में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो बंद लिफाफे या डिजिटल माध्यम से बंदोबस्त हेतु पंद्रह दिवस की सूचना दी जाएगी।

दंड, निलंबन और अपील का प्रावधान

निर्धारित मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में एक लाख से दो लाख रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर उल्लंघन की स्थिति में मान्यता रद्द की जा सकती है। यदि कोई विद्यालय निर्णय से असंतुष्ट रहता है, तो वह निश्चित शुल्क का भुगतान कर तीस दिनों के भीतर उच्च प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।

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