मां बगलामुखी मंदिर में अवैध वसूली मामला: जांच दल ने खंगाले दस्तावेज, बैंक खातों की जांच

मां बगलामुखी मंदिर

नलखेड़ा, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में सरकारी प्रबंध समिति को पूरी तरह दरकिनार कर एक निजी संस्था द्वारा लाखों रुपये की अवैध वसूली के गंभीर मामले में प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए गठित किए गए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल ने मंगलवार को मंदिर परिसर पहुंचकर अपनी जांच शुरू की। जांच दल ने निजी संस्था के महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त करने के साथ ही उसके सदस्यों के बयान दर्ज किए और बैंक में स्थित खातों को भी गहराई से खंगाला।

बुधवार को कलेक्टर द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच दल में शामिल जिला पंचायत सीईओ बी.एस. सोलंकी, जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी एवं नगर परिषद नलखेड़ा की सीएमओ सुश्री मिनी अग्रवाल दोपहर करीब एक बजे मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष कमल मंडलोई तथा पदेन सचिव एवं तहसीलदार प्रियंका श्रीवास्तव भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बंद कमरे में पूछताछ और अवैध वसूली की स्वीकारोक्ति

मंदिर पहुंचे जांच दल के सदस्यों द्वारा गैर सरकारी संस्था “नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति” से संबंधित तमाम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया गया। इसके बाद समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को अलग ले जाकर बंद कमरे में मैराथन पूछताछ की गई। सूत्रों से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, इस कड़ी पूछताछ के आगे समिति के सदस्य ज्यादा देर टिक नहीं सके।

पूछताछ के दौरान गैर सरकारी संस्था के सदस्यों ने यह स्वीकार किया है कि वे मां बगलामुखी मंदिर में  आने वाले श्रद्धालुओं से रजत सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर सोना, चांदी और भारी-भरकम नगदी रुपये वसूल रहे थे। इस स्वीकारोक्ति के बाद मंदिर परिसर में समानांतर व्यवस्था चलाकर की जा रही अवैध उगाही का सच अब पूरी तरह सामने आ गया है।

बैंक लॉकर में मिले सोना, चांदी और लाखों रुपये

दस्तावेजों की पड़ताल और बयानों के बाद जांच दल तुरंत नगर के चौक बाजार में स्थित मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा में पहुंचा। वहां दल के अधिकारियों ने इस गैर सरकारी संस्था के नाम पर संचालित बैंक खातों और लॉकर की बारीकी से जांच की। बैंक रिकॉर्ड खंगालने पर यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि संस्था के बैंक लॉकर में भारी मात्रा में सोना और चांदी जमा है, साथ ही बैंक खाते में भी लाखों रुपये की राशि जमा की गई है। इस वित्तीय लेन-देन के सामने आने के बाद अब जांच का दायरा और अधिक बढ़ गया है।

कलेक्टर की जांच पर उठे गंभीर सवाल

भले ही मामला तूल पकड़ने पर जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर उसे सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इस जांच की निष्पक्षता पर शुरुआत से ही गंभीर उंगलियां उठने लगी हैं। नगर और पीड़ित श्रद्धालुओं के बीच यह बड़ा सवाल गूंज रहा है कि जब प्रतिमाह लाखों रुपये की अवैध वसूली के हिसाब से पिछले दो वर्षों में यह कुल राशि करोड़ों रुपये में पहुंचती है, तो फिर जांच के मुख्य बिंदुओं में इस गैर सरकारी संस्था को इतनी बड़ी चंदा उगाही की मूक अनुमति देने वाले तत्कालीन मां बगलामुखी मंदिर प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष एवं सचिव की भूमिका को शामिल क्यों नहीं किया गया? आखिर किसकी शह पर और किसकी नाक के नीचे यह सब काला खेल चलता रहा? आम जनता में यह संशय गहरा रहा है कि क्या प्रशासन अपने ही रसूखदार अधिकारियों को बचाने के लिए इस पूरी जांच को महज एक ‘खानापूर्ति’ तक ही सीमित रखना चाहता है?

इन प्रमुख बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि प्रशासन वाकई इस भ्रष्टाचार का अंत करना चाहता है, तो जांच दल को कुछ बेहद महत्वपूर्ण और कड़े बिंदुओं पर केंद्रित होकर काम करना चाहिए। सबसे पहले यह साफ होना चाहिए कि आखिर किस जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मंदिर परिसर के भीतर “नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति” को सीधे दान या कीमती आभूषण स्वीकार करने की कोई आधिकारिक लिखित अनुमति दी गई थी? यदि ऐसी कोई अनुमति फाइल पर मौजूद है, तो उसका आदेश कब और किसके हस्ताक्षर से जारी हुआ था? और यदि कोई आधिकारिक अनुमति नहीं थी, तो यह निजी समिति इतने लंबे समय से मंदिर परिसर में किस हैसियत और अधिकार से अपनी दुकान चला रही थी?

इसके अलावा, वर्ष 2024 से लेकर अब तक इस अवैध समिति द्वारा श्रद्धालुओं से लूटे गए दान, सोने-चांदी और नगदी रुपये का कोई सरकारी रिकॉर्ड या रसीद कट्टा उपलब्ध है या नहीं? क्या इस समानांतर व्यवस्था से आए दान का आज तक कोई ऑडिट कराया गया है? यदि ऑडिट हुआ है, तो उसकी रिपोर्ट को आज तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) पर भी उठ रहा है, जिन पर इस समिति को पूरा संरक्षण देने के सीधे आरोप लग रहे हैं। क्या प्रशासन उन पर लगे आरोपों की कोई स्वतंत्र जांच कराएगा?

यदि इस जांच में बड़ी वित्तीय अनियमितता और गंभीर गड़बड़ी सामने आती है, तो क्या दोषियों पर केवल विभागीय कार्रवाई होगी या सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा? भविष्य में विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन क्या नई ठोस व्यवस्था लागू करने जा रहा है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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