एमआईसी सदस्य ने अधिकारियों पर जताई नाराजगी, आयुक्त से शिकायत
उज्जैन, अग्निपथ। रंग पंचमी के दिन और सोमवार को शहर के कई इलाको में क्रत्रिम जल संकट के हालात बन गए। शहर में 13 पानी की टंकिया भरी ही नहीं जा सकी। यह स्थिति तब है जब न तो गंभीर डेम में पानी की कमी है और न ही किसी तरह की तकनीकी समस्या सामने आई थी। केवल कुप्रबंधन की वजह से ही शहर के कई इलाको में लोग दो दिन पानी को तरसते रहे।
सोमवार सुबह क्षीरसागर, देवासगेट, भेरूगढ़, दमदमा, सुदामा नगर, सुभाष नगर, इंदिरा नगर, नागझिरी, त्रिवेणी, महेश नगर और विक्रम नगर की टंकियो से पानी सप्लाय नहीं हो सका। इनमें से कुछ इलाकों में रविवार को भी जलप्रदाय नहीं हो सका था। शहर के बड़े हिस्से में नलो से पानी नहीं पहुंचने की शिकायतों के बाद कई पार्षदों ने महापौर मुकेश टटवाल से बात की।
महापौर ने सुबह एमआईसी सदस्य व पीएचई के प्रभारी शिवेंद्र तिवारी को अधिकारियों की बैठक लेने को कहा। इस बैठक में पता चला कि पानी सप्लाय में न तो किसी तरह की तकनीकी समस्या थी और न ही गंभीर बांध से शहर तक पानी लाने में किसी तरह की दिक्कत थी, इसके बावजूद भी 13 टंकियो को पर्याप्त मात्रा में नहीं भरा जा सका। टंकिया भरने के सिस्टम के कुप्रबंधन की वजह से ये हालात बने थे।
स्थाई कार्यपालन यंत्री जरूरी
पीएचई के पास लंबे वक्त से कोई स्थाई कार्यपालन यंत्री नहीं है। व्यवस्था संभालने के लिए सहायक यंत्री राजीव शुक्ला को कार्यपालन यंत्री पद का प्रभार दिया गया है लेकिन उनके पास पहले से दूसरे भी काफी सारे कामों का प्रभार है। दो अन्य सहायक यंत्रियों में से एक छुट्टी पर है। अधिकारियों का नियंत्रण नहीं होने की वजह से निचले स्तर के कर्मचारियों की पीएचई में मनमानी चल रही है। पीएचई की पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त हो चुकी है।
पानी का प्रबंधन बिगडऩे के मामले में अधिकारियों से बात की है। आयुक्त को भी इसकी जानकारी दी गई है। पानी पर्याप्त है, कहीं कोई समस्या भी नहीं थी, फिर भी पानी नहीं पहुंचा सके। ये लापरवाही की हद है। संबंधित लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी प्रस्तावित करेंगे।
– शिवेंद्र तिवारी, एमआईसी सदस्य