महाकाल की दर्शन व्यवस्था की वाराणसी में भी तारीफ

वाराणसी में चल रहे 51 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों समागम में हर मंदिर में ऐसी व्यवस्था लागू करने की बात उठी

उज्जैन, अग्निपथ। वाराणसी में उज्जैन के महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था की तारीफ हुई है। ऐसी व्यवस्था देश के सभी प्रमुख मंदिरों में लागू करने की बात उठी है। पहली बार यह अनूठा आयोजन वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है। इसमें 51 शक्तिपीठों के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रबंधक और पुजारी हिस्सा लेने पहुंचे हैं।

उज्जैन से महाकाल मंदिर पुरोहित अध्यक्ष लोकेंद्र व्यास कार्यक्रम में शामिल हुए है। उज्जैन का प्रतिनिधित्व करते हुए पं. व्यास ने समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि महाकाल मंदिर में व्यवस्था काफी अच्छी है। ऐसी व्यवस्था अन्य मंदिरों में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों की व्यवस्था और निर्माण ऐसा होना चाहिए कि आम दर्शनार्थियों को उसका लाभ मिले। निर्माण व व्यवस्था की प्लानिंग में मंदिर से जुड़े लोग भी शामिल रहे और ट्रस्ट के भी लोग रहे। उन्होंने कहा कि जब से महाकाल कॉरिडोर बना तब से भक्तों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।

वाराणसी में 51 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों समागम

यूपी में पहली बार यह अनूठा आयोजन वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के अलावा विदेश में मौजूद 51 शक्तिपीठों के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रबंधक और पुजारी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इनमें पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि देश शामिल हैं। 51 महिलाओं ने शंखनाद करके कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम में इन सभी पवित्र स्थानों की देखरेख करने वालों को एकजुट करने की कवायद शुरू की गई है। यह आयोजन 1 दिसंबर को समाप्त होगा। आयोजित होने वाले कार्यक्रम में कुल 400 संत-महंत जुटे हैं। उद्घाटन सत्र में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक मौजूद रहे। 1 दिसंबर को सीएम योगी भी उपस्थित रहेंगे।

शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंगों के प्रबंधन के बीच सामंजस्य की जरूरत

महा समागम का आयोजन सेंटर फॉर सनातन रिसर्च और ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट की तरफ से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। आयोजक डॉ. रमन त्रिपाठी ने बताया कि मां सती के अंगों से निर्मित 51 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के इस महान समागम में भारत समेत श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर समेत कई स्थानों से 400 साधु-संत, पीठाधीश्वर और इन पवित्र स्थान से जुड़े महंत और प्रबंधन समिति के लोग शामिल हो रहे हैं।

डॉ. रमन त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र पर सनातन रिसर्च के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनेकों माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करते हुए रचनात्मक कार्यों के जरिए लोगों तक सनातन धर्म के मूल्य धाम दर्शन और संस्कारों को पहुंचना है। अभी तक इन सभी शक्तिपीठों में आपसी सामंजस्य नहीं है, न ही द्वादश ज्योतिर्लिंगों के बीच आपसी सामंजस्य है। आयोजन में आने वाले शक्तिपीठों के प्रमुख और संतों की मौजूदगी में शक्तिपीठ और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रबंधन में मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है।

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