शाजापुर, अग्निपथ। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक मरीज की मौत के बाद महीनों तक न्याय के लिए भटक रहे परिजनों के सब्र का बांध गुरुवार को टूट गया। इंसाफ और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर बवाल काटा। हालात इस कदर बिगड़ गए कि अस्पताल प्रबंधन को स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस बल की मदद लेनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, यह विवाद 11 दिसंबर 2025 को अस्पताल में इलाज के दौरान हुई कमलेश जादमे नामक मरीज की मौत से जुड़ा है। घटना के बाद से ही मृतक के परिजन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी ढुलमुल रवैये से नाराज होकर परिवार ने गुरुवार को अस्पताल पहुंचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
हाई डोज और अनदेखी का आरोप
परिजनों का सीधा आरोप है कि इलाज के दौरान कमलेश को दवा का हाई डोज दिया गया था, जिसके बाद किसी भी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ ने उनकी सुध नहीं ली। उनका कहना है कि इसी घोर लापरवाही और उचित चिकित्सीय ध्यान न मिलने के कारण कमलेश की जान गई। परिजनों ने अस्पताल में नारेबाजी करते हुए प्रबंधन पर अपना आक्रोश निकाला।
पुलिस के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
परिवार के बढ़ते हंगामे को देख अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। जब प्रबंधन स्थिति को संभालने में विफल रहा, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और प्रबंधन की पोल खोल दी है। परिजन अब भी दोषी स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
