मीडिया के जाने पर लगाया प्रतिबंध, कलेक्टर स्पॉट पर ही मौजूद
उज्जैन। शाही मस्जिद मामले में दूसरे दिन मंगलवार को सबकुछ सामान्य रहा। प्रशासन के सहयोग से मस्जिद कमेटी के लोगों द्वारा तुड़ाई की जाती रही। लेकिन कवरेज के लिये किसी भी मीडिया कर्मी को सराफा से आगे नहीं जाने दिया गया। ऐसे में लोगों में ऐसी चर्चा चल पड़ी है कि संभवत: इसी दौर में खड़े हनुमानजी को विस्थापित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
दरअसल, शाही मस्जिद से पहले खड़े हनुमानजी को विस्थापित करने की कार्ययोजना जिला प्रशासन ने तैयार कर ली थी। लेकिन मूर्ति खंडित न हो जाय इसको लेकर मंदिर के पुजारी और प्रशासनिक अधिकारियों को संशय था। जिसके चलते मंदिर के आसपास की मिट्टी का परीक्षण कर भी नगरनिगम के इंजीनियरों से स्थिति जानी थी। प्रशासन ने मूर्ति स्कैनर मशीन लाकर इसकी स्थिति जानने की बात भी कही गई थी। इसके बाद पूरा मामला होल्ड पर हो गया था।
सोशल मीडिया ने पूरे देशभर में कर दिया प्रचारित
पूरा मामला सोशल मीडिया पर चला गया और बाहर बैठे मीडिया इंफ्लूएंसरों ने खड़े हनुमानजी रील्स बनाकर प्रचारित प्रसारित कर दिया। लिहाजा एक ही सप्ताह में यह मामला देशभर की सुर्खी बन गया। महाकाल दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का भी यहां पहुंचना शुरु हो गया था। देखते ही देखते यहां पर धर्मसंसद सहित सभी धार्मिक आयोजन शुरु कर दिये गये। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पाइंट को छोड़कर शाही मस्जिद पर काम करना शुरु कर दिया। जिसका असर यह रहा कि अब शाही मस्जिद मुख्य केन्द्र बिंदू बन गई।
छत्रीचौक पर किया जा सकता स्थापित
हालांकि पूरा मामला शाही मस्जिद का चल रहा है, लेकिन जानकारी में आया है कि एक दो दिन पहले छत्री चौक की भी साफसफाई कर दी गई थी। लोगों में चर्चा है कि इस मामले के ही बीच में खड़े हनुमानजी को भी यहां से विस्थापित कर छत्रीचौक में स्थापित किया जा सकता है।
मीडिया का प्रवेश किया बंद..
दरअसल, शाही मस्जिद मामले को कुछ मीडिया इंफ्लूएंसरों ने सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह से दिखाया कि मुस्लिम समाज के कुछ अराजक तत्वों को हरकत करने का मौका मिल गया। उन्होंने न केवल पुलिस बल्कि अपने ही शहर काजी साहब के मकान पर दो बार पत्थरों से हमला किया। उनके घर के सीसीटीवी फोड़ दिये गये और उनको घर में ही बंद रहने पर मजबूर कर दिया गया।
सोमवार तो ठीक लेकिन मंगलवार की दोपहर 12 बजे से शहर के मीडिया को खड़े हनुमान मंदिर से पहले लगाये गये बैरिकेड़ से पहले रोका जाना शुरु कर दिया। पुलिसकर्मियों का कहना था कि मीडिया को यहां जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर शहर के लोगों में इस बात की आशंका और चर्चा चल पड़ी कि संभवत: इसी दौरान खड़े हनुमानजी को भी यहां से विस्थापित करने की कार्रवाई की जा सकती है।

