भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर सरकार की चिंता बढ़ गई है। अब सरकार ने डेल्टा प्लस की समय पर पहचान कर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सभी जिलों से सैंपल भेज कर जीनोम सिक्वेंसिंग कराने का निर्णय लिया है। यह जानकारी रविवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने दी।
बता दें प्रदेश में अब तक डेल्टा प्ल्स के 8 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें तीन मरीज भोपाल, दो उज्जैन, दो रायसेन और एक अशोकनगर का है। उज्जैन और अशोकनगर में दो मरीजों की मौत हो चुकी है। अभी तक प्रदेश में सिर्फ 25 जिलों से ही सैंपल भेजकर जीनोम सिक्वेंसिंग की जा रही थी।
इनके भेजे जाएंगे सैंपल
सरकार जिले में कोरोना के गंभीर मरीज, दोबारा संक्रमित होने वाले, वैक्सीन लगाने के बाद कोरोना की चपेट में आने वाले, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती और दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ितों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उनके सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजेगी।
इस तरह करेंगे चयन
स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि प्रदेश के सभी 52 जिलों से 15 दिनों में 300 सैंपल सेंनिटल लैब को भेजे जाएंगे। इसमें से 50 सैंपल का रेडम चयन कर NSDC दिल्ली को भेजा जाएगा।
कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखें
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमें यह ध्यान रखना है कि कोरोना कम हुआ है। खत्म नहीं हुआ। मेरा निवेदन है कि सभी अनुशासन और संयण के साथ रहें। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूर पहने और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करें।
क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग
जीनोम सिक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं।